-अमेरिका में शिक्षक को वी.आई.पी. की श्रेणी में रखा जाता है।
-फ्रांस की न्यायालयों में सिर्फ शिक्षक को ही कुर्सी पर बैठने की अनुमति होती है, शेष लोगों को खड़े रहना पड़ता है।
-जापान में यदि पुलिस को, किसी शिक्षक को, गिरफ्तार करना हो तो उसे पहले जापान की सरकार से विशेष आज्ञा लेनी पड़ती है।
-कोरिया में प्रत्येक शिक्षक अपना पहचान पत्र दिखाकर किसी भी प्रकार की विशेष वी.आई.पी. सुविधा प्राप्त कर सकता है।
लेकिन हमारे भारत में..?? हमारे भारत में, एक शिक्षक को अपने मासिक वेतन के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। अपने मौलिक अधिकारों के लिए लडना पड़ता है। यहां तक की उसे समाज में भी उलाहनाऐं सुननी पड़ती है। हां... वर्ष में एक दिन लोग उन्हे उनके शिक्षक होने की बधाई अवश्य देते है... जैसे मानो उन्हे उनके शिक्षक होने का आभाष कराते हैं।
जरा ध्यान दीजिए की अमेरिका, फ्रांस, जापान और कोरिया वर्तमान में तकनीक, शिक्षा, चिकित्सा, विकास हर क्षेत्र में आगे है। इन देशों के लोग हमसे सौ वर्ष आगे है। पूरे विश्व में एक सुई से लेकर प्रत्येक घरेलू सामानों, तकनीकी संसाधनों, युद्धक हथियारों तक के बाजार हिस्सेदारी में इन चारों देशों के ही 80 प्रतिशत से अधिक सामान बिकते है...
जबकि गुरू शिष्य परम्परा का जन्मदाता हमारा भारत कहां है??
सबको पता है...
गर्त में...
-फ्रांस की न्यायालयों में सिर्फ शिक्षक को ही कुर्सी पर बैठने की अनुमति होती है, शेष लोगों को खड़े रहना पड़ता है।
-जापान में यदि पुलिस को, किसी शिक्षक को, गिरफ्तार करना हो तो उसे पहले जापान की सरकार से विशेष आज्ञा लेनी पड़ती है।
-कोरिया में प्रत्येक शिक्षक अपना पहचान पत्र दिखाकर किसी भी प्रकार की विशेष वी.आई.पी. सुविधा प्राप्त कर सकता है।
लेकिन हमारे भारत में..?? हमारे भारत में, एक शिक्षक को अपने मासिक वेतन के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। अपने मौलिक अधिकारों के लिए लडना पड़ता है। यहां तक की उसे समाज में भी उलाहनाऐं सुननी पड़ती है। हां... वर्ष में एक दिन लोग उन्हे उनके शिक्षक होने की बधाई अवश्य देते है... जैसे मानो उन्हे उनके शिक्षक होने का आभाष कराते हैं।
जरा ध्यान दीजिए की अमेरिका, फ्रांस, जापान और कोरिया वर्तमान में तकनीक, शिक्षा, चिकित्सा, विकास हर क्षेत्र में आगे है। इन देशों के लोग हमसे सौ वर्ष आगे है। पूरे विश्व में एक सुई से लेकर प्रत्येक घरेलू सामानों, तकनीकी संसाधनों, युद्धक हथियारों तक के बाजार हिस्सेदारी में इन चारों देशों के ही 80 प्रतिशत से अधिक सामान बिकते है...
जबकि गुरू शिष्य परम्परा का जन्मदाता हमारा भारत कहां है??
सबको पता है...
गर्त में...