बुधवार, 26 अगस्त 2015

पुणे, के 5 छात्रों को 18 अगस्त को आधी रात में पुलिस ने गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार कर लिया।

अभी कुछ ही दिन बीते हैं जब लाल किले के प्राचीर से हमें आजादी के हसीन ख्वाब दिखाए जा रहे थे। ये आजादी कितनी अधूरी है, इसे 1947 के बाद से ही आम मेहनतकश जनता रोज-बा-रोज के अपनी जिंदगी के कटु अनुभवों से देखती आ रही है। इन्हीं उदाहरणों में एक और इजाफा हुआ है। भारतीय फिल्म एण्ड टेलीविजन संस्थान (FTII) पुणे, के 5 छात्रों को 18 अगस्त को आधी रात में पुलिस ने गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार कर लिया। ये छात्र पिछले 68 दिनों से संस्थान में गजेन्द्र चैहान समेत 5 अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे। ऐसा नहीं है कि ये गिरफ्तारी अचानक हुयी है। हड़ताल के पहले दिन से ही छात्रों को निरंतर डराया-धमकाया जा रहा था। हड़ताल को तुड़वाने के लिए सरकार द्वारा संस्थान का निजीकरण करने की धमकी भी दी गयी। संघी मण्डली द्वारा छात्रों को देशद्रोही-हिन्दू विरोधी आदि तमगों से नवाजकर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश भी की गयी । इन सबके बाद भी जब सरकार के प्रपंच छात्रों को डिगा नही सके तो उसने खुद अपने कुरूप चेहरे से नकाब उतारते हुए, छात्रों पर फर्जी मुकदमें लादकर जेलों में पहुंचा दिया।
सरकार की नजर में ये छात्र अपराधी हैं। पर आम छात्रों और देश की करोड़ों-करोड़ मेहनतकश जनता की नजरों में वे हमारे साथी हैं। क्योंकि वो ऐसी सरकार से संघर्ष कर रहे हैं,